kuchh gham-e-zeest ke aalaam abhii baaki hain | कुछ ग़म-ए-ज़ीस्त के आलाम अभी बाक़ी हैं

  - Habeeb Ahmad Anjum Datiavi
कुछग़म-ए-ज़ीस्तकेआलामअभीबाक़ीहैं
ज़िंदगीतेरेलिएकामअभीबाक़ीहैं
जिनसेवाबस्ताहैशोहरततिरेमय-ख़ानेकी
ऐसेटूटेहुएकुछजामअभीबाक़ीहैं
शबकीतारीकीनेदुनियाकीबहारेंलूटीं
आश्ना-ए-सहर-ओ-शामअभीबाक़ीहैं
हमनेसय्यादकोगुलशनसेनिकालाहैमगर
चार-सूफैलेहुएदामअभीबाक़ीहैं
ख़ारगुलशनसेनिकालेगएलेकिनवोगुल
जिनसेगुलशनहुआबदनामअभीबाक़ीहैं
कबइधरउट्ठेगीतूनिगह-ए-शौक़बता
कितनेपैग़ामतिरेनामअभीबाक़ीहैं
रुकगयाकेकहाँराह-ए-तलबमें'अंजुम'
पए-मंज़िलतिरेदो-गामअभीबाक़ीहैं
  - Habeeb Ahmad Anjum Datiavi
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