mahv-e-hairat hooñ ki aaKHir ye tamasha kya hai | महव-ए-हैरत हूँ कि आख़िर ये तमाशा क्या है

  - Habeeb Ahmad Anjum Datiavi
महव-ए-हैरतहूँकिआख़िरयेतमाशाक्याहै
सुब्हख़ुदपूछरहीहैकिउजालाक्याहै
इसबदलतीहुईदुनियाकाभरोसाक्याहै
सबइसीफ़िक्रमेंबैठेहैंकिहोताक्याहै
बे-अमलहोतोसमझिएकिहैबे-सूदहयात
जिसकामक़्सदहोवोजीनाभीजीनाक्याहै
पूछताहैयेचराग़ोंमेंलहूजलजलकर
तल्ख़ी-ए-दौरबतादेतिरीमंशाक्याहै
मेरीआँखोंसेज़रादिलमेंउतरकरदेखो
लोगकहतेहैंजिसेइश्क़वोहोताक्याहै
हेचहैइसकेलिएदौलत-ए-दुनिया'अंजुम'
काशइंसानसमझलेमिरारुत्बाक्याहै
  - Habeeb Ahmad Anjum Datiavi
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