ajab tha zoom ki bazm-e-aza sajaayenge | अजब था ज़ोम कि बज़्म-ए-अज़ा सजाएँगे

  - Ghufran Amjad
अजबथाज़ोमकिबज़्म-ए-अज़ासजाएँगे
मिरेहरीफ़लहूकेदिएजलाएँगे
मैंतजरबोंकीअज़िय्यतकिसेकिसेसमझाऊँ
कितेरेबादभीमुझपरअज़ाबआएँगे
बसएकसज्दा-ए-ताज़ीमकेतक़ाबुलमें
कहाँकहाँवोजबीन-ए-तलबझुकाएँगे
अतशअतशकीसदाएँउठीसमुंदरसे
तोदश्त-ए-प्यासकेचश्मेंकहाँलगाएँगे
छुपाकेरखतोलियाहैशरार-ए-बू-लहबी
धुआँउठातोनज़रतकमिलापाएँगे
दराज़करतेरहोदस्त-ए-हक़-शनासअपना
बहुतहुआतोवोनेज़ेपेसरउठाएँगे
नवाह-ए-लफ़्ज़-ओ-मआनीमेंगूँजहैकिसकी
कोईबताएये'अमजद'किहमबताएँगे
  - Ghufran Amjad
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