be-chehregi-e-umr khaalat bhi bahut hai | बे-चेहरगी-ए-उम्र ख़जालत भी बहुत है

  - Ghazanfar Hashmi
बे-चेहरगी-ए-उम्रख़जालतभीबहुतहै
इसदश्तमेंगिर्दाबकीसूरतभीबहुतहै
आँखेंजोलिएफिरताहूँख़्वाबमुसलसल
मेरेलिएयेकार-ए-अज़िय्यतभीबहुतहै
तुमज़ाद-ए-सफ़रइतनाउठाओगेकहाँतक
अस्बाबमेंइकरंज-ए-मसाफ़तभीबहुतहै
दोसाँसभीहोजाएँबहमहब्स-ए-बदनमें
उम्र-ए-रवाँइतनीकरामतभीबहुतहै
कुछउजरत-ए-हस्तीभीनहींअपनेमुताबिक़
कुछकार-ए-तनफ़्फ़ुसमेंमशक़्क़तभीबहुतहै
अबमौतमुझेमारकेक्यादेगी'ग़ज़नफ़र'
आँखोंकोतोयेआलम-ए-हैरतभीबहुतहै
  - Ghazanfar Hashmi
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