बे-चेहरगी-ए-उम्र-ए-ख़जालतभीबहुतहै
इसदश्तमेंगिर्दाबकीसूरतभीबहुतहै
आँखेंजोलिएफिरताहूँऐख़्वाब-ए-मुसलसल!
मेरेलिएयेकार-ए-अज़िय्यतभीबहुतहै
तुमज़ाद-ए-सफ़रइतनाउठाओगेकहाँतक
अस्बाबमेंइकरंज-ए-मसाफ़तभीबहुतहै
दोसाँसभीहोजाएँबहमहब्स-ए-बदनमें
ऐउम्र-ए-रवाँ!इतनीकरामतभीबहुतहै
कुछउजरत-ए-हस्तीभीनहींअपनेमुताबिक़
कुछकार-ए-तनफ़्फ़ुसमेंमशक़्क़तभीबहुतहै
अबमौतमुझेमारकेक्यादेगी'ग़ज़ंफ़र'
आँखोंकोतोयेआलम-ए-हैरतभीबहुतहै