jo misl-e-teer chala tha kamaan sa KHam hai | जो मिस्ल-ए-तीर चला था कमान सा ख़म है

  - Ghaus Mohammad Ghausi
जोमिस्ल-ए-तीरचलाथाकमानसाख़महै
निगाह-ए-दोस्तमेंतासीर-ए-इस्म-ए-आज़महै
ख़ुशाकिवोहैंमिरेरू-ब-रूब-नफ़्स-ए-नफ़ीस
ज़हेकिआजमिरीआरज़ूमुजस्समहै
मुहीत-ए-हुस्न-ए-कराँ-ता-कराँनहींसही
बिसात-ए-शीशा-ए-दिलजिसक़दरहैताहमहै
अना-पसंदअनाकेनशेमेंभूलगए
येशहदवोहैकिजिसकेख़मीरमेंसमहै
हवासेकरताहैबातेंतिरीमहकपाकर
तिरेग़ज़ाल-ए-जुनूँमेंबलाकादम-ख़महै
येरंग-ओ-नूरयेख़ुश्बूयेकैफ़-सामानी
हरीम-ए-नाज़हैयाआलिमोंकाआलमहै
जातबस्सुम-ए-लब-हा-ए-ख़ुश्कपरदोस्त
हँसीनहींयेतरक़्क़ीपसंदमातमहै
तोक्याचराग़-ए-तमन्नाकामैंमुहाफ़िज़हूँ
जबउनकोफ़िक्रनहींहैयहींकिसेग़महै
मिरामिज़ाजहैयारोंपेवारदूँख़ुदको
मिरावजूदभीअंगुश्तरीकानीलमहै
धुआँधुआँनज़रआतीहैबज़्म-ए-फ़न'ग़ौसी'
यहाँचराग़ज़ियादाहैंरौशनीकमहै
  - Ghaus Mohammad Ghausi
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