adhuri na-shuneeda dastaan hooñ | अधूरी ना-शुनीदा दास्ताँ हूँ

  - Ghani Ejaz
अधूरीना-शुनीदादास्ताँहूँ
किशायदमैंसमाअ'तपरगराँहूँ
ख़यालोंमेंभीकुछवाज़ेहनहींहै
यक़ींकीगोदमेंपलतागुमाँहूँ
लब-ए-इज़हारचुपहैमेरीख़ातिर
अभीहाँऔरनहींकेदरमियाँहूँ
बुलंदीपरहवालेजारहीहै
चराग़-ए-जिस्मसेउठताधुआँहूँ
कशिशबाज़ारकीरोकेहुएहै
अभीमैंअपनेघरपहुँचाकहाँहूँ
मुझेपाओगेदिलकेपासहरदम
जहाँमहसूसकरलोगेवहाँहूँ
मिरेअंदरहैपोशीदाक़यामत
कमाल-ए-ज़ब्तकाइकइम्तिहाँहूँ
हुए'एजाज़'बूढ़ेतुममगरमैं
ख़ुदाकेफ़ज़्लसेअबतकजवाँहूँ
  - Ghani Ejaz
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