duniya ki masarrat apna le zid chhod de mahv-e-khwaab na ho | दुनिया की मसर्रत अपना ले ज़िद छोड़ दे महव-ए-ख़्वाब न हो

  - Ghamgeen Qureshi
दुनियाकीमसर्रतअपनालेज़िदछोड़देमहव-ए-ख़्वाबहो
मैंतेरेलिएबेताबसहीतूमेरेलिएबेताबहो
इसप्यासकीशिद्दतनेमुझकोमयख़ानेमेंअज़्मतबख़्शीहै
अल्लाहकरेयेरूहमिरीतिश्नाहीरहेसैराबहो
दीदारसेजबमहरूमरहातबमुझकोयेमहसूसहुआ
फिरदिलसेपरस्तिशकौनकरेगरहुस्नतिरानायाबहो
हैसबसेऊँचानामतिराक़िस्मतकाबदलनाकामतेरा
तूजिसपेइनायतफ़रमाएवोज़र्राक्यूँमहताबहो
हँसकरसहीआँसूपीकरयेउम्रतोकटहीजाएगी
परतुझकोलोगकहेंगेक्या'ग़मगीन'अगरशादाबहो
  - Ghamgeen Qureshi
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