shab-e-firaq se maanoos-e-gham ka maara hooñ | शब-ए-फ़िराक़ से मानूस-ए-ग़म का मारा हूँ

  - Ghamgeen Qureshi
शब-ए-फ़िराक़सेमानूस-ए-ग़मकामाराहूँ
उभरताचाँदनहींडूबतासिताराहूँ
ज़मानेवालोअगरहोसकेतोरहमकरो
मिरीहँसीउड़ाओमैंबे-सहाराहूँ
नवाज़ोंदार-ओ-रसनसेकिखालखिंचवाओ
बसएकबारयेकहदोकिमैंतुम्हाराहूँ
मिलेगामेरातआ'रुफ़कहाँकिताबोंमें
मैंअहल-ए-दर्दकेचेहरोंसेआश्काराहूँ
वोजिससेपाईहैतनवीरचाँदसूरजने
मैंउसकेइश्क़में'ग़मगीन'दिलकोहाराहूँ
  - Ghamgeen Qureshi
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