jabeen-e-shauq pe gard-e-malaal chahti hai | जबीन-ए-शौक़ पे गर्द-ए-मलाल चाहती है

  - Ghalib Ayaz
जबीन-ए-शौक़पेगर्द-ए-मलालचाहतीहै
मिरीहयातसफ़रकामआलचाहतीहै
मैंवुसअतोंकातलबगारअपनेइश्क़मेंहूँ
वोमेरीज़ातमेंइकयर्ग़मालचाहतीहै
हमेंख़बरहैकिउसमेहरबाँकीचारागरी
हमारेज़ख़्मोंकाकबइंदिमालचाहतीहै
तुम्हारेबादमिरीआँखज़िदपेगईहै
वहीजमालवहीख़द्द-ओ-ख़ालचाहतीहै
हमउसकेजब्रकाक़िस्सातमामचाहतेहैं
औरउसकीतेग़हमाराज़वालचाहतीहै
हरीरुतोंकोइधरकापतानहींमालूम
बरहनाशाख़अबसदेख-भालचाहतीहै
  - Ghalib Ayaz
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