chashm-e-tamanna | चश्म-ए-तमन्ना

  - Ghalib Ahmad
चश्म-ए-तमन्ना
जिसेनींदआईथीसदियोंकीबीमारियोंकीथकनसे
जागउट्ठीहैशायद
बदनमेंनयादिनशगूफ़ेकीमानिंदउभरा
शफ़क़-ज़ारबनकर
दिलकीआग़ोशमेंबसाहै
नज़ारेमेंमसहूररहनेकीख़्वाहिशजनमलेरहीहै
बसाकरउसेअपनीनज़रोंमें
शादाबआँखोंमेंरहनेकोजीचाहताहै
वहीरंग-ओ-बूकीहरारतकीहल्कीलकीरें
तमाज़तकेझोंकेबदनछूरहेहैं
बहारगईयादकीवादियोंमें
सफ़रकेइरादोंसेमायूसकश्ती
किनारेपेयूँँलगीहै
किठहरीहुईझीलकीरौशनीमेंनयाघरबसाहै
येचश्म-ए-तमन्नाकीकश्तीबनीहैनयाआशियाना
नीलगूँरौशनीतैरतीहै
मगरयेखड़ीहै
ज़मानेमोहब्बतकेफिरलौटआएहैंशायद
वक़्तकेठहरजानेकीशायदघड़ीहै
क़यामतकड़ीहै
  - Ghalib Ahmad
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