hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
George Puech Shor
paik-e-khyaal bhi hai ajab kya jahaan-numa
paik-e-khyaal bhi hai ajab kya jahaan-numa | पैक-ए-ख़याल भी है अजब क्या जहाँ-नुमा
- George Puech Shor
पैक-ए-ख़याल
भी
है
अजब
क्या
जहाँ-नुमा
आया
नज़र
वो
पास
जो
अपने
से
दूर
था
उस
माह-रू
पे
आँख
किसी
की
न
पड़
सकी
जल्वा
था
तूर
का
कि
सरासर
वो
नूर
था
देते
न
दिल
जो
तुम
को
तो
क्यूँँ
बनती
जान
पर
कुछ
आप
की
ख़ता
न
थी
अपना
क़ुसूर
था
ज़र्रे
की
तरह
ख़ाक
में
पामाल
हो
गए
वो
जिन
का
आसमाँ
पे
सर-ए-पुर-ग़ुरूर
था
- George Puech Shor
Download Ghazal Image
आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
Send
Download Image
32 Likes
ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
Send
Download Image
26 Likes
सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
Send
Download Image
25 Likes
हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
Send
Download Image
27 Likes
कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
47 Likes
कबूतर
इश्क़
का
उतरे
तो
कैसे?
तुम्हारी
छत
पे
निगरानी
बहुत
है
इरादा
कर
लिया
गर
ख़ुद-कुशी
का
तो
ख़ुद
की
आँख
का
पानी
बहुत
है
Read Full
Kumar Vishwas
Send
Download Image
92 Likes
तेरी
तस्वीर
हट
जाएगी
लेकिन
नज़र
दीवार
पर
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
86 Likes
आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
221 Likes
मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
Read Full
S M Afzal Imam
Send
Download Image
17 Likes
मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
41 Likes
Read More
ये
फ़र्क़
जीते
ही
जी
तक
गदा-ओ-शाह
में
है
वगर्ना
बा'द-ए-फ़ना
मुश्त-ए-ख़ाक
राह
में
है
निशाँ
मक़ाम
का
ग़म
और
न
रहनुमा
कोई
ग़रज़
कि
सख़्त
अज़िय्यत
अदम
की
राह
में
है
गदा
ने
छोड़
के
दुनिया
को
नक़्द-ए-दीं
पाया
भला
ये
लुत्फ़
कहाँ
शह
के
इज़्ज़-ओ-जाह
में
है
पसंद-तब्अ
नहीं
अपनी
चार
दिन
का
मिलाप
मज़ा
तो
ज़ीस्त
का
ऐ
मेरी
जाँ
निबाह
में
है
Read Full
George Puech Shor
Download Image
0 Likes
रुके
है
आमद-ओ-शुद
में
नफ़स
नहीं
चलता
यही
है
हुक्म-ए-इलाही
तो
बस
नहीं
चलता
हवा
के
घोड़े
पे
रहता
है
वो
सवार
मुदाम
किसी
का
उस
के
बराबर
फ़रस
नहीं
चलता
गुज़िश्ता
साल
जो
देखा
वो
अब
के
साल
नहीं
ज़माना
एक
सा
बस
हर
बरस
नहीं
चलता
नहीं
है
टूटे
की
बूटी
जहान
में
पैदा
शिकस्ता
जब
हुआ
तार-ए-नफ़स
नहीं
चलता
Read Full
George Puech Shor
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Haar Shayari
Shaam Shayari
Corruption Shayari
Deedar Shayari
Shaayar Shayari