paik-e-khyaal bhi hai ajab kya jahaan-numa | पैक-ए-ख़याल भी है अजब क्या जहाँ-नुमा

  - George Puech Shor
पैक-ए-ख़यालभीहैअजबक्याजहाँ-नुमा
आयानज़रवोपासजोअपनेसेदूरथा
उसमाह-रूपेआँखकिसीकीपड़सकी
जल्वाथातूरकाकिसरासरवोनूरथा
देतेदिलजोतुमकोतोक्यूँँबनतीजानपर
कुछआपकीख़ताथीअपनाक़ुसूरथा
ज़र्रेकीतरहख़ाकमेंपामालहोगए
वोजिनकाआसमाँपेसर-ए-पुर-ग़ुरूरथा
  - George Puech Shor
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