अफ़्साना-ए-हयातकोदोहरारहेहैंहम
अपनेकिएकीआपसज़ापारहेहैंहम
ऐचश्म-ए-यारतेरीनिगाहोंकाशुक्रिया
अबज़िंदगी-ओ-मौतकोबहलारहेहैंहम
छेड़ाथाहमनेज़िक्रकिसीबज़्म-ए-नाज़का
कहनेलगेवोहँसकेचलोआरहेहैंहम
येरहगुज़रहैकौनसीकुछसूझतानहीं
ऐबे-ख़ुदीबताकिकहाँजारहेहैंहम
छेड़ाजोहमनेराहमेंज़ाहिदनेयेकहा
फिरआजमय-कदेकीतरफ़जारहेहैंहम
तारीकरहगुज़रनेबड़ेफ़ख़्रसेकहा
अब'रौशनी'केगीतग़ज़लगारहेहैंहम