afsaana-e-hayaat ko dohraa rahe hain ham | अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहे हैं हम

  - Geeta Thakur Raushni
अफ़्साना-ए-हयातकोदोहरारहेहैंहम
अपनेकिएकीआपसज़ापारहेहैंहम
चश्म-ए-यारतेरीनिगाहोंकाशुक्रिया
अबज़िंदगी-ओ-मौतकोबहलारहेहैंहम
छेड़ाथाहमनेज़िक्रकिसीबज़्म-ए-नाज़का
कहनेलगेवोहँसकेचलोरहेहैंहम
येरहगुज़रहैकौनसीकुछसूझतानहीं
बे-ख़ुदीबताकिकहाँजारहेहैंहम
छेड़ाजोहमनेराहमेंज़ाहिदनेयेकहा
फिरआजमय-कदेकीतरफ़जारहेहैंहम
तारीकरहगुज़रनेबड़ेफ़ख़्रसेकहा
अब'रौशनी'केगीतग़ज़लगारहेहैंहम
  - Geeta Thakur Raushni
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