vo tukda raat ka bikhra hua sa | वो टुकड़ा रात का बिखरा हुआ सा

  - Gautam Rajrishi
वोटुकड़ारातकाबिखराहुआसा
अभीतकदिनपेहैठहराहुआसा
उदासीएकलम्हेपरगिरीथी
सदीकाबोझहैपसराहुआसा
इधरखिड़कीमेंथामायूसचेहरा
उधरभीचाँदहैउतराहुआसा
करेहैशोरयूँँसीनेमेंयेदिल
समूचाजिस्महैबहराहुआसा
येकिननज़रोंसेमुझकोदेखतेहो
रहूँहरदमसजा-संवराहुआसा
सुखानेज़ुल्फ़वोआएहैंछतपर
हैसूरजआजफिरसहराहुआसा
लिखाउसनामकापहलाहीअक्षर
मुकम्मलपेजहैचेहराहुआसा
  - Gautam Rajrishi
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