mata-e-ishq zaraa aur sarf-e-naaz to ho | मता-ए-इश्क़ ज़रा और सर्फ़-ए-नाज़ तो हो

  - Gauhar Hoshiyarpuri
मता-ए-इश्क़ज़राऔरसर्फ़-ए-नाज़तोहो
तज़ी-ए-उम्रकाआख़िरकोईजवाज़तोहो
ब-हम-दिगरकोईशबउससेलब-ब-लबतोचले
हवा-ए-शौक़कुछआलूदा-ए-मजाज़तोहो
क़दमक़दमकोईसायासामुत्तसिलतोरहे
सराबकायेसर-ए-सिलसिलादराज़तोहो
वोकम-सुख़नकम-आमेज़फिरतकल्लुफ़क्या
कुछउससेबाततोठहरेकुछउससेसाज़तोहो
वफ़ासेमंज़िल-ए-तर्क-ए-वफ़ातकनिकले
किसीबहानेतोपत्थरकभीगुदाज़तोहो
शफ़क़किनाया-ए-लबशामइस्तारा-ए-ज़ुल्फ़
कभीख़यालवसीलोंसेबे-नियाज़तोहो
हुज़ूर-ए-नाज़अबसहैख़याल-ए-जाँ'गौहर'
नियाज़महरम-ए-ख़म्याज़ा-ए-नियाज़तोहो
  - Gauhar Hoshiyarpuri
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