haan kaahish-e-fuzool ka haasil bhi kuchh nahin | हाँ काहिश-ए-फ़ुज़ूल का हासिल भी कुछ नहीं

  - Gauhar Hoshiyarpuri
हाँकाहिश-ए-फ़ुज़ूलकाहासिलभीकुछनहीं
लेकिनहयातबे-ख़लिश-ए-दिलभीकुछनहीं
अबसोचलोक़दमहैंज़ियाँ-ए-गाह-ए-शौक़में
कहनाफिरकिजज़्बा-ए-कामिलभीकुछनहीं
गहरासुकूतचापकीआवाज़-ए-बाज़गश्त
रहमेंभीकुछथासर-ए-मंज़िलभीकुछनहीं
जुज़हिर्स-ए-मंफ़अ'ततह-ए-दरियाभीकुछथा
जुज़वहम-ए-आफ़ियतलब-ए-साहिलभीकुछनहीं
सबजज़्ब-ए-आरज़ूकीतमाज़तकाखेलहै
दिलसर्दहोतोगर्मी-ए-महफ़िलभीकुछनहीं
बदलेतोइकनमूना-ए-ए'राज़-ओ-एहतिराज़
यूँँउसनिगहकीराहमेंहाइलभीकुछनहीं
'गौहर'ख़लामेंघूरतेफिरतेहोअबकहो
क्यासचहैभूलनाउसेमुश्किलभीकुछनहीं
  - Gauhar Hoshiyarpuri
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