shaayri baat nahin garm-e-sukhan hone ki | शा'इरी बात नहीं गर्म-ए-सुख़न होने की

  - Gauhar Hoshiyarpuri
शा'इरीबातनहींगर्म-ए-सुख़नहोनेकी
शर्तहीऔरहैशाइस्ता-ए-फ़नहोनेकी
मैंकिहर-दममुझेबालीदगी-ए-रूहकीफ़िक्र
रूहकोफ़िक्रहैवारस्ता-ए-तनहोनेकी
रम-ब-रमसिलसिला-ए-मौज-ए-ग़ज़ालान-ए-ख़याल
दश्त-ए-ग़ुर्बतकोबशारतहोवतनहोनेकी
परतव-ए-रंगसेगुलगूँहुआमामूरा-ए-चश्म
धूमहैकू-ए-तमाशाकेचमनहोनेकी
हक़-परस्तीकोयहाँकौनहैआमादा-ए-दार
किसकोतौफ़ीक़हैबे-गोर-ओ-कफ़नहोनेकी
याबचेगासहरतककोईदरमाँदा-ए-शब
यासहरहीनहींख़ाकम-ब-दहनहोनेकी
दर्दकीसाल-गिरहख़ैरसेगुज़रे'गौहर'
गईरातवहीचाँद-गहनहोनेकी
  - Gauhar Hoshiyarpuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy