ghar se be-zaar hooñ college men tabi'at na lage | घर से बे-ज़ार हूँ कॉलेज में तबीअ'त न लगे

  - Fuzail Jafri
घरसेबे-ज़ारहूँकॉलेजमेंतबीअ'तलगे
इतनीअच्छीभीकिसीशख़्सकीसूरतलगे
एकइकइंचपेउसजिस्मकेसत्तरसत्तर
बोसेलीजेतोभलाक्यूँँवोक़यामतलगे
ज़हरमीठाहोतोपीनेमेंमज़ाआताहै
बातसचकहिएमगरयूँँकिहक़ीक़तलगे
आईना-अक्समिरेहाथतजल्लीग़ाएब
मेरेदुश्मनकोभीया-रबमिरीआदतलगे
  - Fuzail Jafri
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