guzre hain bees baras ik din | गुज़रे हैं बीस बरस इक दिन

  - Fakhr Zaman
गुज़रेहैंबीसबरसइकदिन
इकज़ोरकीआँधीआईथी
जिससेपेड़ोंसेजुदाहोकर
लाखोंहीपत्तेटूटगिरे
शाह-राहोंपरपगडंडियोंपर
खेतोंमेंऔरफ़ुटपाथोंपर
कुछबहगएगंदेनालोंमें
भंगीकीझाड़ूकेसदक़े
लेकिनजोबचगएउनकोहवा
हर-वक़्तउड़ाएफिरतीहै
पच्छिमकोकभीपूरबकोकभी
वोबिखरेपड़ेहैंअबहर-सू
औरहर-दमपिसतेरहतेहैं
भारी-भरकमबूटोंकेतले
  - Fakhr Zaman
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