log kahte hain ki qaateel ko maseeha kahiye | लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए

  - Faiz ul Hasan Khayal
लोगकहतेहैंकिक़ातिलकोमसीहाकहिए
कैसेमुमकिनहैअँधेरोंकोउजालाकहिए
चेहरेपढ़नातोसभीसीखगएहैंलेकिन
कैसीतहज़ीबहैअपनोंकोपरायाकहिए
जानेपहचानेहुएचेहरेनज़रआतेहैं
वक़्तक़ातिलहैयहाँकिसकोमसीहाकहिए
आपजिसपेड़केसाएमेंखड़ेहैंइसकोसहन-ए-गुलशननहींजलताहुआसहराकहिए
सबकेचेहरोंपेहैंअख़्लाक़-ओ-मुरव्वतकेनक़ाब
किसकोअपनायहाँऔरकिसकोपरायाकहिए
शबकेमाथेपेकोईसायानुमूदारहुआ
उसकोअबप्यारकेआँगनकासवेराकहिए
ज़हर-ए-तन्हाई-ए-ग़मपीकेमोहब्बतमें'ख़याल'
किसतरहमौतकोजीनेकासहाराकहिए
  - Faiz ul Hasan Khayal
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