jism ki ret bhi mutthi se fisal jaayegi | जिस्म की रेत भी मुट्ठी से फिसल जाएगी

  - Faiz rahil Khan
जिस्मकीरेतभीमुट्ठीसेफिसलजाएगी
मौतजबरूहलिएघरसेनिकलजाएगी
सुब्हआएगीजनाज़ेमेंलिएसूरजको
याद-ए-माज़ीमेंअगररातपिघलजाएगी
अगकेबसमेंनहींअपनीहिफ़ाज़तकरना
तोफ़क़तमोमजलाआगभीजलजाएगी
ख़ाना-ए-दिलमेंबसीचश्म-ए-लहूमाँगेंहै
सोचताथाकिखिलौनेसेबहलजाएगी
शामजबलौटगईछोड़केतन्हातुझको
तामुझेछोड़केअबरातभीढलजाएगी
अश्कनिकलेगाधुआँबनकेइसीमहफ़िलसे
शम्अ'जबकूदकेउसआगमेंजलजाएगी
पाँवफिसलातोगिरेगीवोकिसीदलदलमें
ज़िंदगीमौतनहींहैकिसँभलजाएगी
  - Faiz rahil Khan
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