laga ki jaise kisi kaanpate hiran ko chhua | लगा कि जैसे किसी काँपते हिरन को छुआ

  - Faiz Khalilabadi
लगाकिजैसेकिसीकाँपतेहिरनकोछुआ
हमारेहाथोंनेजबफूलसेबदनकोछुआ
तमामजिस्ममेंआसूदगीसीफैलगई
तिरेदहननेकभीजबमिरेदहनकोछुआ
सिमटकेगईकाग़ज़पेसूरत-ए-अशआर
हमारीफ़िक्रनेजबभीकिसीघुटनकोछुआ
कईमक़ामपेदोनोंमिलेज़रूरमगर
किशननेराधाकोराधानेकबकिशनकोछुआ
लिपटकेपहुँचामैंजबनेकियोंकीख़ुशबूमें
लहदकीमिट्टीनेडरतेहुएकफ़नकोछुआ
कभीहोसकीइज़हार-ए-इश्क़कीजुरअत
येऔरबातकईसूरतोंनेमनकोछुआ
हमअपनीजानभीकरदेंगे'फ़ैज़'उसपेनिसार
अगरकिसीनेकभीअज़मत-ए-वतनकोछुआ
  - Faiz Khalilabadi
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