dil men ab yuñ tire bhule hue gham aate hain | दिल में अब यूँँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं

  - Faiz Ahmad Faiz
दिलमेंअबयूँँतिरेभूलेहुएग़मआतेहैं
जैसेबिछड़ेहुएकाबेमेंसनमआतेहैं
एकइककरकेहुएजातेहैंतारेरौशन
मेरीमंज़िलकीतरफ़तेरेक़दमआतेहैं
रक़्स-ए-मयतेज़करोसाज़कीलयतेज़करो
सू-ए-मय-ख़ानासफ़ीरान-ए-हरमआतेहैं
कुछहमींकोनहींएहसानउठानेकादिमाग़
वोतोजबआतेहैंमाइल-ब-करमआतेहैं
औरकुछदेरगुज़रेशब-ए-फ़ुर्क़तसेकहो
दिलभीकमदुखताहैवोयादभीकमआतेहैं
  - Faiz Ahmad Faiz
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