tasveer-e-na-mukammal ik tishnagi ka KHaaka | तस्वीर-ए-ना-मुकम्मल इक तिश्नगी का ख़ाका

  - Faisal Azeem
तस्वीर-ए-ना-मुकम्मलइकतिश्नगीकाख़ाका
परफड़फड़ारहाहैअन्क़ामिरीसदाका
सबक्यूँदिखारहेहैंमौहूमसीख़राशें
पूछाथासिर्फ़मैंनेबीमारसेदवाका
दीवानगीनहींजोछूछूकेदेखताहूँ
आँखेंहीअबमिलीहैंअंधाथामैंसदाका
हाथोंकोजानेकबसेबसधोएजारहाहूँ
सादासकैनवसपरसायासाहैहवाका
छेड़ोइनरगोंकोशाख़ेंयेफूलसीहैं
मरहममिलसकेगाफिरज़ख़्म-ए-नारवाका
वहमोंकीसौहैंशक्लेंलकड़ीकेएकघरमें
क्याक्यानहींदिखातायेरातकाखटाका
इकबे-दिमाग़हाथीलश्करसेमिलाहै
अबयेदिमाग़होगालश्करकेनक़्श-ए-पाका
  - Faisal Azeem
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy