palken neend se bojhal hain ya ab manzar ki taab nahin | पलकें नींद से बोझल हैं या अब मंज़र की ताब नहीं

  - Faisal Azeem
पलकेंनींदसेबोझलहैंयाअबमंज़रकीताबनहीं
क्यूँइनजलतीआँखोंमेंअबरंग-बिरंगेख़्वाबनहीं
इकमुद्दतसेकिसनातिक़कीनोक-ए-ज़बाँपरअटकाहूँ
मैंइकलफ़्ज़हूँगोयावोभीमा'नीसेसैराबनहीं
आँखेंहैंयाख़ार-ए-मुग़ीलाँचेहराहैयासहराहै
लफ़्ज़बहुतनायाबहैंप्यारेदर्दमगरनायाबनहीं
मेरीबलासेझुकनेवालोंमेंमा'बूदभीशामिलहों
लेकिनमिरेसज्दोंमेंबुत-ख़ानेकेआदाबनहीं
फ़ितरतकापैग़म्बरक्याजानेसमझौतेकीबातें
दरियामुड़सकतेहैंलेकिनदरियाकेसैलाबनहीं
आँखेंऔरचुनेंगीकबतकआख़िरमंज़रकीकिर्चें
मुझमेंतोअबजैसेअपनीनज़रोंकीभीताबनहीं
  - Faisal Azeem
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