kuchh roz chaahaton ka ajab silsila raha | कुछ रोज़ चाहतों का अजब सिलसिला रहा

  - Fahmida Mosarrat Ahmad
कुछरोज़चाहतोंकाअजबसिलसिलारहा
वोधड़कनोंमेंप्यारकीसूरतबसारहा
इकशख़्सजिसकोदिलसेभुलायाथाबारबार
येदिलकिफिरभीउसकोसदासोचतारहा
जिसकेजुनूँमेंहमनेबितादीतमामउम्र
येक्याकिउम्रभरहीवोहमसेख़फ़ारहा
येसचहैमुझसेहाथछुड़ाकरवोजाचुका
जाताउसेमैंदूरतलकदेखतारहा
तुमउसकीबे-रुख़ीपेपरेशाँहोकिसलिए
दिलतोड़नातोउसकासदामश्ग़लारहा
चाहतमेंअपनाज़ौक़-ए-सफ़रभीअजीबथा
उससेहीशौक़-ए-हुस्न-ए-'मसर्रत'सजारहा
  - Fahmida Mosarrat Ahmad
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