buto kuchh had bhi hai jour-o-jafa ki | बुतो कुछ हद भी है जौर-ओ-जफ़ा की

  - Faheem Gorakhpuri
बुतोकुछहदभीहैजौर-ओ-जफ़ाकी
हैआख़िरइंतिहाहरइब्तिदाकी
जगहक्याहोइनआँखोंमेंहयाकी
भरीहोजिनमेंशोख़ीइंतिहाकी
शब-ए-ग़मआनेमेंकरतीहैग़म्ज़े
अदाभातीनहींमुझकोक़ज़ाकी
मिरादिललेकेअबमुझपरयेज़ुल्मआह
दग़ाकीतूनेज़ालिमदग़ाकी
मज़ाहैमय-कशीकाअब्रमेंआज
फ़लकपरछाईहैरहमतख़ुदाकी
बुतोंकीमेहरबानीक्याकरमक्या
इनायतचाहिएमुझपरख़ुदाकी
तुझेबे-वफ़ाचाहाहुईचूक
तुझेदिलनेदियामैंनेख़ताकी
येक्यूँउड़ताहैचेहरेकामिरेरंग
हुईकिसशोख़कोहाजतहिनाकी
वोलेंगेजानभीवाँलेकेइकदिन
ख़बरथीइब्तिदामेंइंतिहाकी
चलादिलकूचा-ए-गेसूकोजिसदम
दु'आकीपढ़केदमरद्द-ए-बलाकी
गएथेवोजहाँहमढूँढ़लेते
मददमिलतीजोउनकेनक़्श-ए-पाकी
दिल-ए-मुज़्तरकीकुछहालतपूछो
तड़पबिजलीमेंहैआजइंतिहाकी
जबआतेहैंचढ़ाजातेहैंदोफूल
वोतुर्बतपर'फहीम'-ए-मुब्तलाकी
  - Faheem Gorakhpuri
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