sehar ke vaqt | सहर के वक़्त

  - Ejaz Farooqi
सहरकेवक़्त
कुँवारीज़मीनशबनममेंनहाकेलेटीहै
वोसब्ज़चादर-ए-गुल-ताब
आरिज़-ए-महताब
ख़ुमार-ए-ख़्वाबकाआलम
वोइंतिज़ारकाआलम
किदूरदेससेजैसे
कभीतोआएगा
वोदूरदेससेसूरजकादेवताआया
औरअपनीतेज़निगाहोंसेगुदगुदीकरता
वोजौफ़-उल-अर्ज़केनिस्फ़ुन्नहारपरपहुँचा
ज़मींपेख़ौफ़कीइकज़र्दलहरसीफैली
मगरवोसब्ज़साजादूकुँवारीदुल्हनका
फ़ज़ापेछाहीगयाइकख़ुमारकाआलम
उतरगयाहरेशीशेमेंदेवताआख़िर
वोशामलम्सधुँदलका
लबोंकारंगलबोंमेंघुला
हसीनथामंज़र
लज़ीज़थालम्हा
हवाकीअंगड़ाई
औरउसकेबा'दभयानकहवाकेज़न्नाटे
  - Ejaz Farooqi
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