jab bhi us ka khayal karta hooñ | जब भी उस का ख़याल करता हूँ

  - Ejaz Ali Arshad
जबभीउसकाख़यालकरताहूँ
अपनीग़ज़लोंमेंरंगभरताहूँ
शहरसउसकेजबगुज़रताहूँ
ख़ुद-बख़ुदटूटताबिखरताहूँ
देखताहूँबुलंदियोंकीतरफ़
सीढ़ियाँजबकभीउतरताहूँ
आपडरतेहैंअपनेदुश्मनसे
औरमैंदोस्तोंसेडरताहूँ
ज़ालिमोंसेतुझेकरमकीउमीद
मैंतिरीसादगीपेमरताहूँ
मैंमुसाफ़िरहूँधूपका'अरशद'
मैंकहाँछाँवमेंठहरताहूँ
  - Ejaz Ali Arshad
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