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Ejaz Ali Arshad
bheed chaaron taraf magar tanhaa
bheed chaaron taraf magar tanhaa | भीड़ चारों तरफ़ मगर तन्हा
- Ejaz Ali Arshad
भीड़
चारों
तरफ़
मगर
तन्हा
लोग
रहते
हैं
उम्र
भर
तन्हा
कारवाँ
कारवाँ
हर
इक
मंज़र
आदमी
आदमी
मगर
तन्हा
सैकड़ों
क़ाफ़िले
गुज़रते
हैं
और
रहती
है
रहगुज़र
तन्हा
अब
मुहाफ़िज़
भी
लूट
लेते
हैं
छोड़
कर
जाइए
न
घर
तन्हा
रोज़
मिलता
हूँ
सैकड़ों
से
मगर
रोज़
जाता
हूँ
अपने
घर
तन्हा
दोस्तों
की
तलाश
में
'अरशद'
लौट
कर
आ
गई
नज़र
तन्हा
- Ejaz Ali Arshad
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अगर
तलाश
करूँँ
कोई
मिल
ही
जाएगा
मगर
तुम्हारी
तरह
कौन
मुझ
को
चाहेगा
Bashir Badr
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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हमीं
तलाश
के
देते
हैं
रास्ता
सब
को
हमीं
को
बा'द
में
रस्ता
दिखाया
जाता
है
Varun Anand
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जो
तुम्हें
मंज़िल
पे
ले
जाएँगी
वो
राहें
अलग
हैं
मैं
वो
रस्ता
हूँ
कि
जिस
पर
तुम
भटक
कर
आ
गई
हो
Harman Dinesh
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कभी
तो
मुझे
छोड़
जाओगे
तुम
भी
कहोगे
मुझे
अब
कि
फुर्सत
नहीं
है
भला
इस
तरह
क्यूँ
सताने
लगे
हो
कहीं
छोड़
जाने
की
हसरत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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जब
भी
उस
का
ख़याल
करता
हूँ
अपनी
ग़ज़लों
में
रंग
भरता
हूँ
शहरस
उस
के
जब
गुज़रता
हूँ
ख़ुद-बख़ुद
टूटता
बिखरता
हूँ
देखता
हूँ
बुलंदियों
की
तरफ़
सीढ़ियाँ
जब
कभी
उतरता
हूँ
आप
डरते
हैं
अपने
दुश्मन
से
और
मैं
दोस्तों
से
डरता
हूँ
ज़ालिमों
से
तुझे
करम
की
उमीद
मैं
तिरी
सादगी
पे
मरता
हूँ
मैं
मुसाफ़िर
हूँ
धूप
का
'अरशद'
मैं
कहाँ
छाँव
में
ठहरता
हूँ
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Ejaz Ali Arshad
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