jazbaat ki shiddat se nikhrta hai bayaañ aur | जज़्बात की शिद्दत से निखरता है बयाँ और

  - Ehsan Jafri
जज़्बातकीशिद्दतसेनिखरताहैबयाँऔर
ग़ैरोंसेमोहब्बतमेंसँवरतीहैज़बाँऔर
एहसासकीपलकोंमेंतिरीयादकापरतव
ग़मगीनबनादेताहैमहफ़िलकासमाँऔर
गुज़रेहुएहालातसेबनतीहैकहानी
गिरतेहुएतारोंसेमुनव्वरहैमकाँऔर
मुझकोबताज़ीस्तकेइम्कानबहुतहैं
मिट्टीमेंनमीहोतोउभरतेहैंनिशाँऔर
आँगनहीमेंख़ुशबूकोमुक़य्यदकरोतुम
परवाज़सेमिलजाएँगेइंसाँकोजहाँऔर
  - Ehsan Jafri
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