tere dar se uthe gham uthaate rahe | तेरे दर से उठे ग़म उठाते रहे

  - Ehsan Jafri
तेरेदरसेउठेग़मउठातेरहे
बज़्म-ए-ख़्वाब-ए-मोहब्बतसजातेरहे
चलतेचलतेमिलेकितनेदश्त-ए-जुनूँ
गीतउल्फ़तकेहमतोसुनातेरहे
ख़ुदतोजेहद-ओ-अमलसेगुरेज़ाँरहे
नक़्श-ए-क़िस्मतमगरवोबतातेरहे
यूँँतोतारीकथीअपनीराह-ए-सफ़र
ख़ून-ए-दिलसेदिएहमजलातेरहे
रेगज़ारोंमेंहुस्न-ए-वफ़ाकासिला
यारयारोंसेनज़रेंचुरातेरहे
  - Ehsan Jafri
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