sha'ir hue to kya hue ehsaan hi rahe | शाइ'र हुए तो क्या हुए 'एहसान' ही रहे

  - Ehsan Darbhangavi
शाइ'रहुएतोक्याहुए'एहसान'हीरहे
'मिर्ज़ा'-ओ-'मीर'बनसकेख़ानहीरहे
इम्काँकेदाएरेकोजोवुसअ'तदेसके
अपनेहुदूद-ए-ज़ातकाइरफ़ानहीरहे
जबदिलहोमुज़्तरिबतोकहाँतकख़ुदीकीलाज
नाज़-ए-हुस्नआजतिरीआनहीरहे
आहटकिसीकेपाँवकीआईसुब्हतक
हमदिलकीधड़कनोंकेनिगहबानहीरहे
पहुँचादस्त-ए-शौक़जोदामान-ए-यारतक
बे-शग़लक्यूँहोअपनागरेबानहीरहे
हैइल्तिजा-ए-शौक़मेंभीतनतनावही
'एहसान'इश्क़करकेभी'एहसान'हीरहे
  - Ehsan Darbhangavi
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