samajh sakte nahin jo tere maathe ki shikan saaqi | समझ सकते नहीं जो तेरे माथे की शिकन साक़ी

  - Ehsan Darbhangavi
समझसकतेनहींजोतेरेमाथेकीशिकनसाक़ी
वोक्याजानेंकिहैबादा-कशीभीएकफ़नसाक़ी
निकालउनकोसुबू-ओ-जाममेंजोफ़र्क़करतेहैं
तमीज़-ए-बेश-ओ-कमहैअक़्लकादीवाना-पनसाक़ी
तकल्लुफ़बरतरफ़हमशौक़कीमस्तीसेडरतेहैं
यहीहैराहबरसाक़ीयहीहैराहज़नसाक़ी
नज़रआतीहैसारीकाएनात-ए-मय-कदारौशन
येकिसकेसाग़र-ए-रंगींसेफूटीहैकिरनसाक़ी
हक़ीक़तएकहैसबकीवोमा'बदहोकिमय-ख़ाना
बनातीरहीहैंमंज़िलेंमेरीथकनसाक़ी
उठालेजाम-ओ-मीनाख़त्मकरयेदौर-ए-मय-नोशी
कियादआतेहैंमुझकोतिश्ना-कामान-ए-वतनसाक़ी
पस-ए-ख़ुमबैठकर'एहसान'कोकुछसोचलेनेदे
छिड़ाहैमय-कदेमेंक़िस्सा-ए-दार-ओ-रसनसाक़ी
  - Ehsan Darbhangavi
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