kabhi kabhi jo vo gurbat-kade men aa.e hain | कभी कभी जो वो ग़ुर्बत-कदे में आए हैं

  - Ehsan Danish
कभीकभीजोवोग़ुर्बत-कदेमेंआएहैं
मिरेबहेहुएआँसूजबींपेलाएहैं
सरगुज़िश्त-ए-सफ़रपूछमुख़्तसरयेहै
किअपनेनक़्श-ए-क़दमहमनेख़ुदमिटाएहैं
नज़रतोड़सकीआँसुओंकीचिलमनको
वोरोज़अगरचेमिरेआईनेमेंआएहैं
उसएकशम्असेउतरेहैंबाम-ओ-दरकेलिबास
उसएकलौनेबड़ेफूल-बनजलाएहैं
येदोपहरयेज़मींपरलिपाहुआसूरज
कहींदरख़्तदीवार-ओ-दरकेसाएहैं
कलीकलीमेंहैधरतीकेदूधकीख़ुशबू
तमामफूलउसीएकमाँकेजाएहैं
नज़रख़लाओंपेऔरइंतिज़ारबे-वा'दा
ब-ईंअमलभीवोआँखोंमेंझिलमिलाएहैं
फ़ुसून-ए-शेरसेहमउसमह-ए-गुरेज़ाँको
ख़लाओंसेसर-ए-काग़ज़उतारलाएहैं
रिसालाहाथसेरखतेक्यूँँवोशर्माकर
ग़ज़लपढ़ीहैतोहमसामनेभीआएहैं
चलेहैंख़ैरसेउनकोपुकारने'दानिश'
मगरवोयूँँतोआएँगेऔरआएहैं
  - Ehsan Danish
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