aaj bhadki rag-e-wahshat tire deewaanon ki | आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की

  - Ehsan Danish
आजभड़कीरग-ए-वहशततिरेदीवानोंकी
क़िस्मतेंजागनेवालीहैंबयाबानोंकी
फिरघटाओंमेंहैनक़्क़ारा-ए-वहशतकीसदा
टोलियाँबंधकेचलींदश्तकोदीवानोंकी
आजक्यासूझरहीहैतिरेदीवानोंको
धज्जियाँढूँढतेफिरतेहैंगरेबानोंकी
रूह-ए-मजनूँअभीबेताबहैसहराओंमें
ख़ाकबे-वजहनहींउड़तीबयाबानोंकी
उसने'एहसान'कुछइसनाज़सेमुड़करदेखा
दिलमेंतस्वीरउतरआईपरी-ख़ानोंकी
  - Ehsan Danish
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