phir mujhe kaun-o-makaan dasht-o-bayaabaan se lage | फिर मुझे कौन-ओ-मकाँ दश्त-ओ-बयाबाँ से लगे

  - Ehsan Akbar
फिरमुझेकौन-ओ-मकाँदश्त-ओ-बयाबाँसेलगे
रू-ब-रूकौनथाजोआईनेहैराँसेलगे
कुछथीकम-हौसलगीअपनीथीकुछबे-सब्री
कुछमुझेइश्क़केहंगा
मेंभीआसाँसेलगे
वक़्तकटतारहाथाअहद-ए-हुज़ूरीकीफ़िराक़
ज़ख़्मलगतेरहेचाहेकिसीउनवाँसेलगे
ज़ीस्तहमहारकेभीहाथमिलाएँतुझसे
अपनेयेहौसलेशायदतुझेअर्ज़ांसेलगे
ज़िंदगीमेरेइज़ाफ़ेमुझेवापसकरदे
झाड़देख़ारजोनाहक़तिरेदामाँसेलगे
  - Ehsan Akbar
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