zeest jis | ज़ीस्त जिस

  - Nazar Dwivedi
ज़ीस्तजिस
मेंतूशामिलनहींहै
फिरवोजीनेकेक़ाबिलनहींहै
ख़त्महोतीनहींज़िंदगीयह
मौतसांँसोंकीमंज़िलनहींहै
सचकीराहोंपेचलकरतोदेखो
कामइतनाभीमुश्किलनहींहै
हमनेपायाबहुतकुछहैलेकिन
यहइनायतसेहासिलनहींहै
दाग़दामनसेख़ूँकेछुड़ाकर
वोमसीहाहैक़ातिलनहींहै
वक़्तकीमारसेहैपरेशाँ
आदमीइतनाजाहिलनहींहै
हैबहुतख़ूब-सूरतवोलेकिन
उसकेसीनेमेंबसदिलनहींहै
इसहक़ीक़तसेग़ाफ़िलनहींहूँ
मेरीकश्तीकासाहिलनहींहै
  - Nazar Dwivedi
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