ek khidki thii dikhi mujhko khulii shaam ke baad | एक खिड़की थी दिखी मुझको खुली शाम के बाद

  - Nazar Dwivedi
एकखिड़कीथीदिखीमुझकोखुलीशामकेबाद
यादआईथीक़समकलभीतेरीशामकेबाद
शे'रआयाहीनहींकोईज़बांँपरमेरा
सिर्फ़तेरीहीग़ज़लमैंनेपढ़ीशामकेबाद
यादआईथीअचानकहीमुझेबच्चोंकी
एकचिड़ियाजोकहींछतपेगिरीशामकेबाद
जानेकितनेहीमनाज़िरथेमेरीनज़रोंमें
बादमुद्दतजोतेरीबातचलीशामकेबाद
यादआयाथामुझेफिरसेकिसीकावा'दा
नींदआँखोंकीमेरीफिरसेउड़ीशामकेबाद
सूखेज़ख़्मोंकेनिशानोंसेलहूटपकाफिर
टीससीनेमेंकोईफिरसेउठीशामकेबाद
रोज़ीरोटीकीमशक़्क़तमेंमेरादिनगुज़रा
प्यासआँखोंकीकिताबोंसेबुझीशामकेबाद
जोसुनातीथीसदाक़तकीकहानीदिनभर
उसहवेलीसेकोईचीख़उठीशामकेबाद
फिरवहीदर्दवहीअश्कवहीतन्हाई
दिलसेनिकलीथीकोईआहदबीशामकेबाद
लौटआईथींसतानेकाइरादाकरके
फिरसेयादोंसेमेरीजंगछिड़ीशामकेबाद
  - Nazar Dwivedi
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