ghada gunaah ka ik roz bharne vaala tha | घड़ा गुनाह का इक रोज़ भरने वाला था

  - Nazar Dwivedi
घड़ागुनाहकाइकरोज़भरनेवालाथा
सँवरचुकाथावोशायदबिखरनेवालाथा
यक़ीनतुमनेभीअच्छानहींकियाउसपर
वोअपनीबातसेइकदिनमुकरनेवालाथा
कमालयेहैकिज़िन्दामैंबचगयाकैसे
मैंअपनीमौतसेपहलेहीमरनेवालाथा
बग़ैरईदकेकैसेदिखाअचानकये
फ़लकसेचाँदतोकलशबउतरनेवालाथा
जानेकैसेइरादाबदलदियाउसने
मेरावजूदजोमिस्मारकरनेवालाथा
तुम्हारीयादोंनेउसकोहराकियाकर
जिगरकाज़ख़्मयेजब-जबभीभरनेवालाथा
ज़बानतल्ख़हैउसकोपतातोथालेकिन
नसीहतोंसेवोकैसेसुधरनेवालाथा
मेरेनसीबनेमुझकोदग़ादियातब-तब
सफ़रकेबादमैंजबभीठहरनेवालाथा
किसीअजीबसीउलझनमेंपड़गयावोतब
हमारीपीठपेजबवारकरनेवालाथा
अदूकीबातोंमेंआतानहींअगरतूतो
तेरीनिगाहसेमैंकबउतरनेवालाथा
  - Nazar Dwivedi
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