tu apna hi nahin sabka bahut tha | तू अपना ही नहीं सबका बहुत था

  - Nazar Dwivedi
तूअपनाहीनहींसबकाबहुतथा
अदीबोंमेंतेराचरचाबहुतथा
तलबजिसकीथीउसकोपागयामैं
मगरख़ुदकोहीफिरढूँढाबहुतथा
रहाख़ुदकोबचाताआईनेसे
वोअपनेआपसेडरताबहुतथा
वोजिसकीआँखोंमेंआँसूभरेहैं
सुनाहैशख़्सवोहँसताबहुतथा
सलीक़ेसेछुपाकररखलियामैं
भेरेभीतरभीदुखपिन्हाबहुतथा
सज़ामुझकोमिलीइसजुर्मकीबस
जिसेचाहाउसेचाहाबहुतथा
मुझेअफ़सोसदरियाकानहींकुछ
मेरेहिस्सेकाइकक़तराबहुतथा
ख़ुदाकीरहमतेंतोकमनहींथीं
मगरमैंनेभीतोमाँगाबहुतथा
सभीसेआशनाईकीसनकथी
नज़ररिश्तोंमेंभीधोखाबहुतथा
  - Nazar Dwivedi
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