sab kuchh luta ke aaj yahii sochta hooñ main | सब कुछ लुटा के आज यही सोचता हूँ मैं

  - Nazar Dwivedi
सबकुछलुटाकेआजयहीसोचताहूँमैं
अबतकतुम्हारेइश्क़मेंक्यूँमुब्तलाहूँमैं
इकदिनपढ़ेंगेलोगमुझेजानताहूँमैं
अबतककिसीगुनाहसाख़ुदमेंछुपाहूँमैं
जैसेकोईहिसाबहोबाक़ीबचाहुआ
आसेबसाजोख़ुदकेहीपीछेपड़ाहूँमैं
नफ़रतसेदेखताहैज़मानायेआजकल
जैसेकिसीग़रीबकीमैलीरिदाहूँमैं
होतीनहींहैंख़त्महीख़ुदसेशिकायतें
लगताहैअपनेआपसेउकतागयाहूँमैं
नाकामहोरहीहैंमिटानेकीकोशिशें
शायदकिसीकेहोंठकीहर्फ़-ए-दुआहूँमैं
तुझकोतोअपनीचालहीचलनीथी'नज़र'
तुझसेनहींनसीबसेअपनेख़फ़ाहूँमैं
  - Nazar Dwivedi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy