desh men pratibha ki itni durdashaayein theen nahin | देश में प्रतिभा की इतनी दुर्दशाएँ थीं नहीं

  - Nazar Dwivedi
देशमेंप्रतिभाकीइतनीदुर्दशाएँथींनहीं
वोवहाँपहुँचेजहाँकीयोग्यताएँथींनहीं
बोलसकताहीनहींथाजबकोईउसकेख़िलाफ़
फिरकिसीगतिरोधकीसम्भावनाएँथींनहीं
इनकोपढ़करऔरसुनकरइनपेहोताथाअमल
जबकिताबोंतकहीसीमितयेऋचाएँथींनहीं
फूलखिलतेथेकभीविश्वासकेचारोंतरफ़
व्यक्तिकीइतनीतोदूषितभावनाएँथींनहीं
वास्तविकताजानपाएहोकेहमतुमसेेअलग
आजतकइतनीहमारीयातनाएँथींनहीं
ग़ौरसेसुनतेथेहमसबदूसरोंकीबातको
आदमीकेमनमेंजबअवहेलनाएँथींनहीं
पीलियाकरतेथेपानीबाघबकरीसाथमें
यानीगाँवोंमेंकभीशहरीहवाएँथींनहीं
कुछकुछतोपापधरतीपरहमेशाहीरहा
हाँमगरइतनीनज़रमेंवासनाएँथींनहीं
  - Nazar Dwivedi
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