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Dipendra Singh 'Raaz'
usse katata nahin tha phone meraa
usse katata nahin tha phone meraa | उस सेे कटता नहीं था फ़ोन मेरा
- Dipendra Singh 'Raaz'
उस
सेे
कटता
नहीं
था
फ़ोन
मेरा
ज़िंदगी
कैसे
काटती
होगी
- Dipendra Singh 'Raaz'
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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ज़िंदगी
और
चल
नहीं
सकती
आने
पे
मौत
टल
नहीं
सकती
Afzal Sultanpuri
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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बस
एक
मोड़
मिरी
ज़िंदगी
में
आया
था
फिर
इस
के
बाद
उलझती
गई
कहानी
मेरी
Abbas Tabish
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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हिज्र
का
फर्ज़
निभाया
है
मैं
ने
शिद्दत
से
साल
दो
साल
तलक
मैं
भी
रहा
हूँ
तन्हा
ख़्वाब
तुमने
जो
दिखाए
थे
मुझे
उल्फ़त
में
मैं
जनाज़े
के
तले
उनके
दबा
हूँ
तन्हा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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याद
आईं
चाँद
की
देखा
जो
तुमको
चाँद
को
देखा
जो
तो
तुम
याद
आईं
Dipendra Singh 'Raaz'
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बोसे
हैं
किसी
और
के
ही
हक़
में
अब
उसके
बाँहें
हैं
किसी
और
को
अब
उसकी
मुयस्सर
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
इक
गली
जिसे
छोड़
हुए
मुझे
बरसों
न
जाने
क्यूँ
मेरे
ख़्वाबों
में
रोज़
आती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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जल
कर
के
राख
हो
गए
हैं
ख़्वाब
सब
मेरे
आँखों
में
रतजगों
के
सिवा
कुछ
नहीं
बचा
Dipendra Singh 'Raaz'
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