hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dipendra Singh 'Raaz'
hijr ka farz nibhaaya hai main ne shiddat se
hijr ka farz nibhaaya hai main ne shiddat se | हिज्र का फर्ज़ निभाया है मैं ने शिद्दत से
- Dipendra Singh 'Raaz'
हिज्र
का
फर्ज़
निभाया
है
मैं
ने
शिद्दत
से
साल
दो
साल
तलक
मैं
भी
रहा
हूँ
तन्हा
ख़्वाब
तुमने
जो
दिखाए
थे
मुझे
उल्फ़त
में
मैं
जनाज़े
के
तले
उनके
दबा
हूँ
तन्हा
- Dipendra Singh 'Raaz'
Download Sher Image
मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
24 Likes
हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
Send
Download Image
51 Likes
महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
Read Full
Darpan
Send
Download Image
33 Likes
ये
जो
हिजरत
के
मारे
हुए
हैं
यहाँ
अगले
मिसरे
पे
रो
के
कहेंगे
कि
हाँ
Ali Zaryoun
Send
Download Image
63 Likes
तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
Send
Download Image
33 Likes
गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
63 Likes
कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
Send
Download Image
19 Likes
मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
43 Likes
शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
Send
Download Image
22 Likes
हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
14 Likes
Read More
हम
देख
कर
के
डर
रहे
थे
धुँद
दूर
से
चलने
लगे
तो
आप
ही
रस्ता
निकल
गया
हम
ढूंँढने
लगे
थे
मसाइल
के
हल
मगर
तब
तक
हमारे
बीच
से
रिश्ता
निकल
गया
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
तुमने
कहा
के
चाहती
थी
तुम
हमें
बहुत
तुमको
हमारी
चाह
थी
मतलब
नहीं
रही
है
प्यार
आज
भी
वही,
बदला
है
कुछ
तो
ये
पहले
तुम्हारी
आरज़ू
थी
अब
नहीं
रही
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
गिला
उस
सेे
भला
किस
बात
का
अब
मैं
करूँँ
यारों
ख़ुदा
ने
ही
मुकद्दर
में
मुहब्बत
जब
नहीं
लिक्खी
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
इस
सेे
पहले
की
तुम
बदल
जाओ
तुम
मिरे
ख़्वाब
से
निकल
जाओ
इश्क़
ताज़ा
तुम्हारा
है
अब
तक
है
अभी
वक़्त
तुम
संभल
जाओ
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
1 Like
लौटा
न
वो
कभी
न
कभी
दर्द
कम
हुआ
अश्कों
के
चींखने
की
सदा
बेअसर
रही
मैंने
तमाम
उम्र
में
बस
की
थी
इक
दु'आ
मेरा
नसीब
वो
भी
दु'आ
बेअसर
रही
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
2 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Festive Shayari
Depression Shayari
Wada Shayari
Intezaar Shayari
Zulm Shayari