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Dipendra Singh 'Raaz'
tumne kaha ke chahti thii tum ha
tumne kaha ke chahti thii tum ha | तुमने कहा के चाहती थी तुम हमें बहुत
- Dipendra Singh 'Raaz'
तुमने
कहा
के
चाहती
थी
तुम
हमें
बहुत
तुमको
हमारी
चाह
थी
मतलब
नहीं
रही
है
प्यार
आज
भी
वही,
बदला
है
कुछ
तो
ये
पहले
तुम्हारी
आरज़ू
थी
अब
नहीं
रही
- Dipendra Singh 'Raaz'
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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तुम्हारे
इश्क़
से
मुझको
अता
हुए
थे
जो
तमाम
ज़ख़्म
वो
मैंने
सदा
हरे
रक्खे
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
अपने
ज़ेहन
में
रखती
थी
पहले
मुझको
फिर
वो
मेरा
नाम
बनाती
थी
अपने
हाथों
पे
Dipendra Singh 'Raaz'
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तमाम
रात
सितारों
से
बात
करते
रहे
इसी
तरह
से
बसर
अपनी
रात
करते
रहे
Dipendra Singh 'Raaz'
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मुझे
यक़ीनन
है
इश्क़
तुझ
सेे,
मैं
इसलिए
कह
रहा
हूँ
क्योंकि
दिखाई
देता
है
तेरा
चेहरा
'फ़राज़'
के
शे'र
में
मुझे
अब
Dipendra Singh 'Raaz'
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आप
आए
जो
मेरे
घर
तो
लगा
यूँंँ
जैसे
नूर
महताब
का
बरसा
है
मेरे
आंँगन
में
Dipendra Singh 'Raaz'
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