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Dipendra Singh 'Raaz'
usne kaha ke yaad na aanaa mujhe kabhi
usne kaha ke yaad na aanaa mujhe kabhi | उसने कहा के याद न आना मुझे कभी
- Dipendra Singh 'Raaz'
उसने
कहा
के
याद
न
आना
मुझे
कभी
सो
मैं
दुआएंँ
कर
रहा
हूँ
मौत
की
मेरे
- Dipendra Singh 'Raaz'
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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तो
क्या
ऐसे
ही
रोना
आ
गया
था
नहीं
वो
याद
लहजा
आ
गया
था
Shadab Javed
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इतना
तो
याद
है
इक
वा'दा
किया
था
लेकिन
हम
ने
क्या
वा'दा
किया
था
हमें
ये
याद
नहीं
Bismil Dehlavi
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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गले
से
लगते
ही
जितने
गिले
थे
भूल
गए
वगर्ना
याद
थीं
हम
को
शिकायतें
क्या
क्या
Abdul Rahman Ehsaan Dehlavi
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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तन्हाइयाँ
तुम्हारा
पता
पूछती
रहीं
शब-भर
तुम्हारी
याद
ने
सोने
नहीं
दिया
Unknown
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ख़ुद
को
मसरूफ़
किए
रखने
की
कोशिश
करना
क्या
तेरी
याद
के
ज़ुमरे
में
नहीं
आता
है
Jawwad Sheikh
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मैंने
फिर
हँस
के
उसे
कह
दिया
अल्लाह
हाफ़िज़
बारहा
देख
रही
थी
वो
घड़ी
की
जानिब
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
उसे
साथ
तो
रख
लेता
किताबों
की
तरह
पर
वो
हर
साल
बदलता
है
निसाबों
की
तरह
जब
हुआ
दिल
तो
वो
आया
न
हुआ
दिल
तो
नहीं
वो
हक़ीक़त
में
भी
आता
है
तो
ख़्वाबों
की
तरह
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Dipendra Singh 'Raaz'
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आप
आए
जो
मेरे
घर
तो
लगा
यूँंँ
जैसे
नूर
महताब
का
बरसा
है
मेरे
आंँगन
में
Dipendra Singh 'Raaz'
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कभी
सुनसान
रस्ते
सा
कभी
सहरा
सा
लगता
है
तुम्हारे
बिन
ये
दिन
मुझको
किसी
बेवा
सा
लगता
है
महीनों
बाद
देखा
जब
मुझे
उसने
तो
वो
बोली
कभी
हम
तुम
मिले
हैं
क्या?
तुम्हें
देखा
सा
लगता
है
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Dipendra Singh 'Raaz'
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ये
सोच
कर
के
कि
उसने
किया
है
याद
मुझे
मैं
मेरी
उँगलियों
पे
हिचकियों
को
गिनता
रहा
पलट
के
उसने
कराया
न
मुझको
चुप
लेकिन
तमाम
रात
मेरी
सिसकियों
को
गिनता
रहा
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Dipendra Singh 'Raaz'
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