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Dipendra Singh 'Raaz'
tumhaara phool maine jab kabhi bhi haath pe rakha
tumhaara phool maine jab kabhi bhi haath pe rakha | तुम्हारा फ़ूल मैंने जब कभी भी हाथ पे रक्खा
- Dipendra Singh 'Raaz'
तुम्हारा
फ़ूल
मैंने
जब
कभी
भी
हाथ
पे
रक्खा
लगा
ऐसे
कि
जैसे
तुमने
मेरा
हाथ
थामा
हो
- Dipendra Singh 'Raaz'
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वो
मिरी
बाहों
में
बे-फ़िक्र
मुलव्विस
हुई
है
कब्र
पे
हार
कोई
फूलों
का
रक्खा
हुआ
है
Raj
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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तोहफ़ा,
फूल,
शिकायत,
कुछ
तो
लेकर
जा
इश्क़
से
मिलने
ख़ाली
हाथ
नहीं
जाते
Tanoj Dadhich
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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पत्ता
पत्ता
बूटा
बूटा
हाल
हमारा
जाने
है
जाने
न
जाने
गुल
ही
न
जाने
बाग़
तो
सारा
जाने
है
Meer Taqi Meer
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
तुम
को
अच्छे
लगे
तो
तुम
रख
लो
फूल
तोड़े
थे
बेचने
के
लिए
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Zia Mazkoor
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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फोन
भी
आया
तो
शिकवे
के
लिए
फूल
भी
भेजा
तो
मुरझाया
हुआ
रास्ते
की
मुश्किलें
तो
जान
लूँ
आता
होगा
उसका
ठुकराया
हुआ
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Balmohan Pandey
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आप
अपने
से
हम-सुख़न
रहना
हमनशीं
साँस
फूल
जाती
है
Jaun Elia
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गूँध
के
गोया
पत्ती
गुल
की
वो
तरकीब
बनाई
है
रंग
बदन
का
तब
देखो
जब
चोली
भीगे
पसीने
में
Meer Taqi Meer
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इज़्ज़त-ओ-आबरू
के
डर
से
फिर
इक
वालिद
ने
अपनी
बेटी
की
मोहब्बत
का
गला
घोंट
दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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झोली
मेरी
ग़मों
से
भले
भर
दे
ऐ
ख़ुदा
लेकिन
जबीं
पे
उसके
कभी
इक
शिकन
न
हो
Dipendra Singh 'Raaz'
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मोहब्बत
जान
लेता
है
जो
यारा
मोहब्बत
जान
ले
लेती
है
उसकी
Dipendra Singh 'Raaz'
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याद
तन्हाई
में
आता
है
तुम्हारा
कहना
दीप
तुमको
कभी
तन्हा
नहीं
छोड़ूँगी
मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
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न
आए
वो
हमें
मिलने
न
आया
फ़ोन
इक
उनका
हमारी
ईद
भी
यारो
मुहर्रम
की
तरह
गुज़री
Dipendra Singh 'Raaz'
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