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Dipendra Singh 'Raaz'
mohabbat jaan leta hai jo yaara
mohabbat jaan leta hai jo yaara | मोहब्बत जान लेता है जो यारा
- Dipendra Singh 'Raaz'
मोहब्बत
जान
लेता
है
जो
यारा
मोहब्बत
जान
ले
लेती
है
उसकी
- Dipendra Singh 'Raaz'
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कोई
समझे
तो
एक
बात
कहूँ
इश्क़
तौफ़ीक़
है
गुनाह
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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देख
मोहब्बत
का
दस्तूर
तू
मुझ
से
मैं
तुझ
से
दूर
कोशिश
लाज़िम
है
प्यारे
आगे
जो
उसको
मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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तुम
मेरी
पहली
मोहब्बत
तो
नहीं
हो
लेकिन
मैंने
चाहा
है
तुम्हें
पहली
मोहब्बत
की
तरह
Wasi Shah
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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वो
जिस
घमंड
से
बिछड़ा
गिला
तो
इस
का
है
कि
सारी
बात
मोहब्बत
में
रख-रखाव
की
थी
Ahmad Faraz
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इलाज
अपना
कराते
फिर
रहे
हो
जाने
किस
किस
से
मोहब्बत
कर
के
देखो
ना
मोहब्बत
क्यूँँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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ये
मोहब्बत
है
ये
मर
जाने
से
भी
जाती
नहीं
तू
कोई
क़ैदी
नहीं
है
जो
रिहा
हो
जाएगा
Ali Zaryoun
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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तुम्हारा
ख़्वाब
आने
पर
अगर
मैं
उठ
भी
जाऊँँ
तो
मैं
काफ़ी
देर
तक
उस
ख़्वाब
से
बाहर
नहीं
आता
Dipendra Singh 'Raaz'
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रख
कर
के
भूल
जाता
था
हर
शय
को
मैं
कभी
लेकिन
तुम्हारा
ग़म
कभी
भूले
नहीं
भुला
Dipendra Singh 'Raaz'
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कल
शाम
कोई
बात
पे
मुद्दत
के
बाद
मैं
हँसने
लगा
था
आइने
ने
चुप
करा
दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
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धोया
नहीं
है
आज
तलक
शर्ट
हमने
वो
पहने
हुए
जिसे
मिले
थे
तुम
सेे
हम
गले
Dipendra Singh 'Raaz'
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रहने
लगे
उदास
तो
लिखने
लगे
थे
शे'र
सूखे
हुए
थे
पेड़
सो
कश्ती
बना
दिया
दिन
भर
लगा
के
उसको
बनाया
था
इक
मकाँँ
साहिल
की
एक
मौज़
ने
मिट्टी
बना
दिया
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Dipendra Singh 'Raaz'
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